संस्कृत को रोजगार से जोडऩे से ही होगा संस्कृत का विकास

संस्कृत भाषा को अधिकतम रोजगार से जोडऩा होगा तभी संस्कृत भाषा का विकास होगा। आज हरियाणा में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना से संस्कृत का प्रचार प्रसार तेजी से होगा। संस्कृत को देव भाषा के साथ साथ जन भाषा बनाने की भी आवश्यकता हैँ। इसके लिए सभी को संस्कृत के  उत्थान के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए।  ये विचार हरियाणा संस्कृत अकादमी के सौजन्य से  स्थानीय गौशाला मार्केट रोड़  स्थित श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित संस्कृत दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहे। उन्होनें कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा संस्कृत प्रेमियों की बहुत वर्ष पूरानी संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने की मांग अब मान ली गई हैँ। सरकार के इस कदम से निश्चित रूप से संस्कृत का प्रचारप्रसार अधिक तेजी से होगा। सरकार को संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए संस्कृत महाविद्यालयों को राजकीय सहायता भी देनी चाहिए। संस्कृत का महत्व किसी भी भाषा से कम नहीं हैं।  उन्होने कहा कि संस्कृत पूरी तरह से वैज्ञानिक एवं कम्प्यूटर पर आधरित है।  समारोह के मुख्य वक्ता आचार्य रमेश मिश्र ने कहा कि संस्कृत को जनउपयोगी बनाने के लिए इसका अधिकतम प्रयोग कम्प्यूटर के लिए करने पर शोध करना पडेगा। यह देव भाषा होने के साथ साथ जन भाषा भी बनाई जानी चाहिए। संस्कृत संस्कारों की भाषा है। अभिभावकों को अपने बच्चों में अच्छे संस्कार देने चाहिए । आज संस्कृत को बचाने के लिए सभी संस्कृत प्रेमियों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उतराखण्ड में  सरकार द्वारा  प्रदेश में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिये जाने से प्रदेश में संस्कृत के प्रचार प्रसार में तेजी आई हैं। उसी प्रकार हरियाणा में भी बीजेपी सरकार को संस्कृत को द्वितीय भाषा का दर्जा देना चाहिए। प्रति वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को संस्कृत दिवस समारोह मनाया जाता है। इस दिन छात्रों को यज्ञोपवीत संस्कार करवाया जाता हैं। विद्वान इस दिन श्रावणी कर्म करते हैं।  श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य विनय मिश्र ने कहा कि आज संस्कृत भाषा को जन जन की भाषा बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। हरियाणा में ही गुरू ग्रंथ साहिब का संस्कृत अनुवाद का कार्य किया जा रहा हैँ। जो कि पूर्ण होने जा रहा हैं। सभी लोकप्रिय ग्रंथों का अनुवाद संस्कृत में किया जाना चाहिए। जिससे की आम जनमानस की रूचि संस्कृत भाषा में बढ़े।  इस अवसर पर बबीना,निकिता शर्मा,सोनिया,सन्तोष,श्वेता जांगड़ा,ममता  आदि ने श£ोकोचारण प्रतियोगिता में भाग लिया। इस अवसर पर प्रहलाद साँंलकी ,मनोज केजड़ीवाल,गुरूदेव शास्त्री,गौरी शंकर शर्मा,आशु शर्मा विकास शास्त्री,सुरेन्द्र शास्त्री,सोनू शास्त्री,विनोद शास्त्री,गजेन्द्र शास्त्री ,अरूण अग्रवाल ,पुनीत जांगड़ा,नामदेव आदि को सम्मानित किया गया।

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