सवर्ण आरक्षण बिल अब कानून बन चुका है राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी

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नयी दिल्ली : दस फीसदी सवर्ण आरक्षण बिल अब कानून बन चुका है। शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों और अल्पसंख्यकों के कुछ हिस्सों को फायदा मिलेगा। इन्हें रोजगार और शिक्षा संस्थानों में फायदा दिया जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, एक हफ्ते के भीतर कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। मालूम हो कि संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इस विधेयक को सिर्फ राष्ट्रपति से मंजूरी मिलना बाकी रह गया था। सामाजिक समरसता को मजबूती देने वाले इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास सुबह ही भेजा गया है। जिसे उन्होंने शाम तक मंजूरी भी दे दी। इसके साथ ही सरकार ने इसे लेकर तुरंत अधिसूचना भी जारी कर दिया है। इससे पहले इस विधेयक को राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू के हस्ताक्षर के लिए एक विशेष संदेशवाहक के जरिए नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) भेजा गया था। खास बात यह है कि सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को यह आरक्षण पहले से दिए जाने वाले आरक्षण कोटे के अतिरिक्त दिया गया है। इसके चलते पहले से मिल रहे आरक्षण कोटे में कोई बदलाव नहीं होगा।

आरक्षण देने के लिए क्या हैं मापदंड
परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा न हो।, परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि न हो।, आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए। म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए।नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो।

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