Mon. Aug 19th, 2019

भूल जाइए Wi-Fi, आ गया Li-Fi : बदल जाएगी आपकी इंटरनेट की दुनिया

नई दिल्ली. इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों लोगों के लिए खुशखबरी है. अब तक वाई-फाई तकनीक का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह एक क्रांतिकारी तकनीक साबित होने जा रही है. लाई-फाई की तकनीक इतनी आधुनिक और इसकी स्पीड इतनी तेज है कि आप मद्धिम रोशनी वाले बल्ब के नीचे खड़े होकर कुछ सेकेंड में अपनी पसंदीदा फिल्म डाउनलोड कर सकते हैं. इस तकनीक के इस्तेमाल से आप अपनी कल्पना को हकीकत में बदलते देख पाएंगे.

gadgets-Forget-Wifi-arrived-Li-Fi-will-change-the-world-of-your-Internet-123998क्या है (लाई-फाई) लाइट फिडेलिटी

घरेलू लाइट बल्ब के माध्यम से नई तरह की वायरलेस इंटरनेट तकनीक ‘लाई-फाई’ ईजाद की गई है, जो ‘वाई-फाई’ से भी तेज इंटरनेट सर्विस प्रदान करेगी. लाई-फाई 1 जीबीपीएस तक की स्पीड से डेटा भेजता है जो वाई-फाई से 100 गुना ज्यादा तेज है. इस तकनीक में डेटा विजिबल लाइट कम्युनिकेशन (वीएलसी) द्वारा ट्रांसफर होता है. नेटवर्क के बीच डेटा एलईडी लाइट्स के जरिए भेजा जाता है जो बहुत तेजी से फ्लिकर करती हैं. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. हेराल्ड हास ने यह तकनीक खोजी है.

लाइट फिडेलिटी एक हाई स्पीड तकनीक है जो विजिबल लाइट कम्यूनिकेशन के जरिए डेटा का ट्रांसमिशन करती है. कहने का मतलब है कि यह तकनीक लाइट्स का इस्तेमाल करते हुए काफी तीव्र गति से डेटा का आदान-प्रदान करती है. जर्मन वैज्ञानिक हेराल्ड हास ने इस नई तकनीक लाई-फाई को ईजाद किया है. एक वार्ता के दौरान हास ने वायरलेस राउटर्स के रूप में लाइटबल्ब्स के इस्तेमाल के बारे में अपनी सोच रखी.

आखिर क्यों क्रांतिकारी यह तकनीक?

कल्पना करिए कि आपके आस-पास के सभी लाइटबल्ब्स वायरलेस हॉट्सपॉट्स के रूप में तब्दील हो जाएं और इन बल्बों से आपको तीव्र गति की इंटरनेट स्पीड मिलने लगे तो क्या होगा. यानी हर जगह आपको इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी और इस इंटरनेट की स्पीड आपकी कल्पना से अधिक होगी.

इस तकनीक के हकीकत में तब्दील हो जाने पर आज की इंटरनेट की दुनिया पूरी तरह से बदल जाएगी. समझा जाता है कि यह लाई-फाई तकनीक रेडियो तरंगों के ट्रांसमिशन पर आधारित वाई-फाई तकनीक से करीब 100 गुना तेज होने जा रही है.

गौरतलब है कि प्रयोगशाला में जांच के दौरान लाई-फाई तकनीक ने प्रति सेकेंड 224 गीगाबाइट की स्पीड प्राप्त की. साफ शब्दों में कहें तो इस तकनीक के जरिए 1 जीबी से ज्यादा की 18 फिल्में एक सेकेंड में डाउनलोड की जा सकेंगी. माना जा रहा है कि 2022 तक यह करीब 113 अरब डॉलर का बिजनेस करेगी.

यह खामी भी

हालांकि इस तकनीक की सबसे बड़ी खामी फिलहाल यह है कि विजिबल लाइट पर निर्भर होने के कारण, यह दीवारों से नहीं गुजर सकती. हास ने कहा, अगले वर्ष तक इसकी खामियों पर काम कर लिया जाएगा और इसे वाई-फाई की तरह ही इस्तेमाल किया जा सकेगा.

वर्ष 2020 तक दुनिया भर में 2600 करोड़ वायरलेस डिवाइस हो जाएंगे, जिनमें 1700 करोड़ इंटरनेट डिवाइस होंगे. पिछले 13 सालों से लाई-फाई तकनीक पर काम कर रहे हास का कहना है कि आने वाले समय में वाई-फाई पर अत्यधिक दबाव बढ़ जाएगा. इसकी जगह लाई-फाई लोगों को इंटरनेट की बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाएगा.

लाइट पर आधारित यह तकनीक हमारी-आपकी इंटरनेट की दुनिया को कितना बदल पाती है, यह देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा.

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