अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में छुट्टी का आनंद लेने के लिए पहुंचे लाखों पर्यटक

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ब्रहमसरोवर के चारों तरफ देखने को मिले गुजराती संस्कृति के बहुरंग

कुरुक्षेत्र ।    ब्रहमसरोवर के चारों तरफ गुजराती संस्कृति के बहुरंग देखने को मिले, इन बहुरंगों की छटा बिखरने के लिए ब्रहमसरोवर के एक घाट पर डांडिया लोक नृत्य और दुसरी तरफ गुजराती पैवेलियन में गरबा लोक नृत्य पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था। अहम पहलू यह है कि गुजरात पैवेलियन में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए खाटियावाड़ थाली सहित अन्य व्यंजनों को रखा गया है। यह पहला अवसर है जिसमें पर्यटकों को गुजराती व्यंजनों का स्वाद चखने को मिल रहा है। इस महोत्सव को अब तक करीब 8 लाख लोग अपनी आंखों से देख चुके है।
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव 2018 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से गुजरात को पार्टनर स्टेट के रुप में आमंत्रित किया गया। इस राज्य की संस्कृति भी अपने आपमें एक अनूठी संस्कृति है, इस संस्कृति से हरियाणा ही नहीं देश-विदेश से कुरुक्षेत्र गीता महोत्सव में पहुंचने वाले पर्यटक अपने आपको आत्मसात कर सके। सरकार का यह सपना भी इस महोत्सव में पूरा होता हुआ नजर आ रहा है।
रविवार को छुट्टी के दिन का फायदा उठाने और खिली धूप में महोत्सव का आनंद लेने के लिए देश-विदेश लाखों पर्यटक ब्रहमसरोवर के तट पर पहुंचे। इन पर्यटकों ब्रहमसरोवर के घाटों पर गुजराती संस्कृति के बहुरंग देखने को मिले। ब्रहमसरोवर के पूर्वी तट के घाटों पर डांडिया लोक नृत्य की झलक पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति आतुर नजर आया।
एनजेडसीसी की तरफ से आमंत्रित किए गए गुजरात के इन कलाकारों ने डांडिया की बेहतरीन प्रस्तुती देकर सबका दिल जीत लिया। इतना ही नहीं इस घाट पर उतर प्रदेश अलमोड़ा का छोलिया, हिमाचल प्रदेश का सिरमौरी नाटी, त्रिपुरा का सेजागिरी, आसाम बिहू, वेस्ट बंगाल का नटवा और राजस्थान के कच्ची घोड़ी लोक नृत्यों नें भी पर्यटकों के दिलो-दिमाग पर अनोखी छाप छोडऩे का काम किया।
इस महोत्सव में भागीदारी राज्य गुजरात द्वारा पुरुषोतमपुरा बाग ब्रहमसरोवर पर गुजरात पैवेलियन लगाया गया है। इस पैवेलियन में जहां पर्यटक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंंद ले रहे है वहीं विभिन्न प्रकार के स्वादिष्टï व्यंजनों का स्वाद चख रहे है। इस पैवेलियन में गुजरात की पारम्परिक वेशभूषा पहन कर कन्या कालेज विपाला की छात्राओं ने प्राचीन कवि नरसी मेहता की रचना पर गरबा लोक नृत्य की प्रस्तुती देकर पर्यटकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
इन कलाकारों के साथ पहुंचे चितरंजन का कहना है कि गरबा की इस प्रस्तुती में गोपियां भगवान श्रीकृष्ण के पहुंचने पर किस प्रकार अपनी खुशी का इजहार करती है और इन क्षणों को उत्सव की तरह मनाने के लिए आनंदित होकर गरबा लोक नृत्य करती है। इस प्रस्तुती को भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्मस्थली सूरत बारडोली के कालेज की छात्राओं ने तैयार किया है।
इस महोत्सव में पहली बार पहुंच कर अपने आपको आनंदित और गौरवान्मित महसुस कर रहे है। अहम पहलु यह है कि इस पैवेलियन में जहां कलाकार गुजरात के पारम्परिक नृत्य गरबा की प्रस्तुती देकर पर्यटकों का नाचने पर मजबूर कर रहे तो वहीं गुजरात के पारम्परिक व्यंजन ढोकला, फाफरा, फुलवाड़ी, वड़ापाव, बैंगन का ओरा, ढोकली, बाजरी रोला, दबेली, भाखरी आदि व्यंजनों का स्वाद भी चख रहे है।
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