‘अंग्रेजी भाषा का ध्वनि विज्ञान और उसमे भारतीय वक्ताओं की समस्याएं’ विषय पर सेमिनार का आयोजन

एसडी पीजी कॉलेज में ‘अंग्रेजी भाषा का ध्वनि विज्ञान और उसमे भारतीय

वक्ताओं की समस्याएं’ विषय पर सेमिनार का आयोजन

एसडी पीजी कॉलेज में एमए अंग्रेजी एवं ओनर्स के विद्यार्थियो के लिए ‘अंग्रेजी भाषा का
ध्वनि विज्ञान और उसमे भारतीय वक्ताओं की समस्याएं’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का
आयोजन किया गया

जिसमे बतौर मुख्य वक्ता प्रो दीप्ति गुप्ता डीन इंटरनेशनल स्टडीज और
चेयरपर्सन अंग्रेजी एवं कल्चरल स्टडीज विभाग पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने शिरकत की तथा
विद्यार्थियो को अपने वृहद ज्ञान से लाभान्वित किया. माननीया मुख्य वक्ता का स्वागत प्राचार्य
डॉ अनुपम अरोड़ा, एमए अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो एसके शर्मा एवं डॉ रवि बाला ने किया.

इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग से प्रो रचना, प्रो अर्पित गुगनानी, डॉ एसके वर्मा, प्रो नरेंद्र
कौशिक और वाणिज्य विभाग से प्रो एसएन शर्मा भी उपस्थित रहे.

प्रो दीप्ति गुप्ता डीन इंटरनेशनल स्टडीज और चेयरपर्सन अंग्रेजी एवं कल्चरल स्टडीज
विभाग पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने अपने विद्वतापूर्ण व्याख्यान में कहा की अंग्रेजी की दो
शिक्षित स्थानीय बोलियों को दुनिया के अधिकांश हिस्सों में एक मानक के तौर पर स्वीकृत
किया गया है.

इनमे से पहली शिक्षित दक्षिणी ब्रिटिश पर आधारित है और दूसरी शिक्षित
मध्यपश्चिमी अमेरिकन पर आधारित है. पहले श्रेणी को हम बीबीसी या रानी की अंग्रेजी भी
कहते है.

प्राप्त उच्चारण के प्रति अपने झुकाव की वजह से यह सर्वाधिक कबीले गौर है क्योंकि
यह कैम्ब्रिज मॉडल का अनुसरण करती है. यह मॉडल यूरोप, अफ्रीका, भारतीय उपमहाद्वीप और
अन्य क्षेत्रों में अन्य भाषाओँ को बोलने वालों को अंग्रेजी सिखाने के लिए एक मानक के तौर पर
काम करता है.

उन्होनें कहा की अंग्रेजी इन्टोनेशन वाली भाषा है जिसका अर्थ है की इस भाषा में

वाणी के उतार-चढाव को परिस्थिति के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है. उतर-चढाव से हम
आश्चर्य, व्यंग्य और एक वाक्य को आसानी से प्रश्न में बदल सकते है. यही विशेषता इस भाषा को
सबसे अलग भी करती है. अंग्रेजी बहुत जोर दे कर बोलने वाली भाषा है अर्थात इस भाषा में
शब्दों, वाक्यों एवं शब्दांशों को उच्चारण के समय अपेक्षाकृत अधिक महत्त्व दिया जाता है.

इस प्रकार के शब्दांशों को एक्सेंचुएटेड या स्ट्रेस्ड कहा जाता है और जिन पर बल नहीं आता है उन्हें
अनएक्सेंचुएटेड या अनस्ट्रेस्ड कहते है. भाषा की इन बारीकियों के बिना हम अंग्रेजी भाषा के मर्म
और उसके सही अर्थों को न तो समझ सकते है और न ही दूसरो को ठीक प्रकार से समझा एवं
संप्रेषित कर सकते है.

उन्होनें कहा की भाषा विज्ञान के पाठ्यक्रम में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों पर
ध्यान केंद्रित करने की जरुरत है जिसमे हम अध्ययन की ध्वनी, व्याकरण, लाक्षणिक,
संज्ञानात्मक, मात्रात्मक, व्यावहारिक शाब्दिक और लिखने के पहलुओं को शामिल कर सकते हैं.
अंग्रेजी के हर विद्यार्थी को चाहिए की वह अंग्रेजी भाषा और साहित्य में ज्ञान अर्जन के साथ-
साथ इसके उच्चारण के प्रति भी सैदेव सचेत रहे.

इससे पहले माननीया प्रो दीप्ति गुप्ता डीन इंटरनेशनल स्टडीज और चेयरपर्सन अंग्रेजी
एवं कल्चरल स्टडीज विभाग पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का स्वागत और उनकी उपलब्धियों के
बारे में बताते हुए प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की प्रो दीप्ति गुप्ता को 30 वर्ष से अधिक
का शिक्षण अनुभव है.

उनके अनुभवी एवं कुशल सानिध्य में लगभग 40 छात्रों को एमफिल और
पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया जा चुका है. वे आईलेट्स आईडीपी ऑस्ट्रेलिया के लिए 4
वर्ष तक बतौर सीनियर एग्जामिनर कार्य कर चुकी है.

ओरिगाँव यूनिवर्सिटी यूएसए, ब्रिटिश काउंसिल के लिए भी वे उल्लेखनीय कार्य कर रही है. अंग्रेजी भाषा के शैलीविज्ञान और ईएलटी
विषयों पर उन्हें महारथ हासिल है. अनुप्रयुक्त भाषा शास्त्र पर किये गए शोध कार्य से उन्हें देश
और विदेश में खूब ख्याति प्राप्त हुई है. उन्होनें इस सेमिनार को विशेष बताते हुए कहा की

विद्यार्थियो को इसका भरपूर लाभ मिलेगा क्योंकि प्रो दीप्ति गुप्ता जैसे विद्वान रोज-रोज
कॉलेज में नहीं पधारते है. उनके व्याख्यान से ज्ञान में वृद्धि के साथ-साथ विद्यार्थियो के
आत्मविश्वास में भी अवश्य ही बढौतरी होगी.

प्रो एसके शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा की अंग्रेजी भाषा में जिसे हम
फोनेटिक्स या फोनोलोजी कहते है उसे सरल हिंदी में स्वानिकी या स्वनविज्ञान के नाम से जाना
जाता है.

 

 

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