लैफ्टिनैंट श्रेया रोजरा ने तलवारबाजी में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम चमकाया पहले लैैफ्टिनैंट व अब अंतराष्ट्र्रीय स्तर पर मैड़ल प्राप्त कर किया नाम रोशन

करनाल    (karnalआदेश त्यागी )     पूरे विश्व में हमारे देश का गौरव बढ़ाने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं अभियान को करनाल की बेटी लेफ्टिनैंट श्रेया रोजरा ने तलवारबाजी की अंर्तराष्ट्रीय प्रयिोगिता में कांस्य पदक जीतकर पूरे विश्व में चमकाने का काम किया है। करनाल निवासी श्रेया रोजरा पुत्री जयपाल ने हाल ही में 16 सितम्बर से 20 सितम्बर तक थाईलैंड में आयोजित अंतराष्र्टीय तलवारबाजी प्रयिोगिता में भाग लेकर कांस्य पदक जीतकर देश का नाम चमकाया। लैफ्टिनैंट श्रेया रोजरा का दो वर्ष पहले भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट के पद पर चयन हुआ था। इसके बाद ट्रेनिंग व कोर्स पूरा कर छह माह तक अपने कोच की देखरेख में तलवारबाजी के खेल का अभ्यास किया। श्रेया के लिए आसान इसलिए भी रहा कि उसने वर्ष 2009 से तलवारबाजी खेलना शुरू किया था व प्रदेश स्तर पर गोल्ड जीतकर नाम रोशन किया था। अब सेना में अधिकारी बनने के बाद श्रेया का मनोबल मजबूत हो चला था।
करनाल की इस बेटी ने थाईलैंड में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश की तरफ से खेलते हुए कांस्य पदक प्राप्त कर जीत का परचम लहराया। इस अंर्तराष्र्टीय प्रतियोगिता में सोलह देशों के खिलाडिय़ों ने भाग लिया था। जिसमें अमेरिका, रूस, यू.के., फ्रांस, ईरान, हांगकांग, बैल्जियम, इंडोनेशिया, ईटली, जापान, आस्ट्रेलिया, भारत व थाईलैंड के खिलाडिय़ों ने भाग लिया। इस दौरान श्रेया के सभी मुकाबले रोमांचकारी रहे। श्रेया रोजरा ने यह उपलब्धि मात्र 24 वर्ष की आयु में प्राप्त कर ली है। लैफ्टिनैंट श्रेया इस समय असम के मीसामारी में पोस्टिड है व कैप्टन के पद पर पदोन्नति मिल चुकी है। जिसकी औपचारिकता शीघ्र पूरी होने जा रही है। श्रेया ने पहले तो जो लड़कियों के लिए सेना में अफसर बनना एक मात्र सपना था उसे पूरा किया व अब देश के लिए मैड़ल जीतकर यह साबित कर दिया कि आज बेटियां किसी क्षेत्र में बेटों से कम न होकर आगे हैं।
लैफ्टिनैंट श्रेया रोजरा मूल निवासी जुंडला के निकट बीड़ माजरा गांव की है व इस समय  करनाल के सैक्टर 13 में अपने पिता एड़वोकेट जयपाल व माता मोना के साथ रह रही है। लैफ्टिनैंट श्रेया रोजरा ने तलवारबाजी में कांस्य पदक जीतने पर कहा कि पदक जीतकर बड़ा अच्छा लगा व अब उसका अगला लक्ष्य 2018 के एशियन गेम्स में गोल्ड़ जीतना व उसके बाद ओलम्पिक में पदक जीतना है। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करेगी। आज के समय में बेटियों का समाज व गांव से बाहर निकलकर प्रदर्शन करने पर लैफ्टिनैंट श्रेया ने कहा कि आज समय बदल रहा है। यदि कुछ करने का जुनून है तो सब कुछ संभव है। आपके सामने बाधाएं अवश्य आएंगी लेकिन ये बाधाएं आपकों रोक नहीं सकती। बस आप आगे बढ़ते चलें। उन्होंने कहा कि उसने करनाल के कर्ण स्टेडिय़म में अपने कोच सत्यवीर के साथ कालेज के दौरान तलवारबाजी का जमकर अभ्यास किया था। जिसकी बदौलत वे देश के लिए पदक जीत पाई। उन्होंने कहा कि लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। जो कि पूरे विश्व में हमारे देश को गौरवान्वित कर रहा है।

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