7 अक्तूबर को घरौंडा में हुए कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद  मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आर्शीवाद से घरौंडा क्षेत्र में विकास कार्यो की झलक दिखनी शुरू हो गई है

IMG-20161013-WA0036घरौंडा/करनाल 12 अक्तूबर:-  ( आदेश त्यागी )   घरौंडा के गंाव बरसत से विकास कार्यो की शुरूआत हो चली है। पिछले दिनों में घरौंडा के विधायक हरविन्द्र कल्याण द्वारा  बरसत गंाव को विधायक आर्दश ग्राम योजना के तहत चुना गया था ,जिसके बारे में भी सभी विभागों के अधिकारियों से बैठक कर के बरसत गंाव के विकास से सम्बन्धित आंकडे तैयार करने के निर्देश दिये थे। इस विषय को लेकर  विभागिय अधिकारियों ने काम करना शुरू कर दिया है। इसी खुशी में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और लड्डू बांटकर खुशियां सांझा की।
हाल ही में कल्याण फार्म हाउस पर सम्पन्न हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में विधायक ने बरसत गांव का विकासात्मक नक्शा बदलने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने विकास कार्याे से सम्बन्धित जो भी मांगे रखी उन पर मुख्यमंत्री ने निर्धारित मापदंड के तहत मोहर लगा दी। गंाव बरसत के आस पास लगभग 20 गंाव लगते है जिनको जोरमर्रा की जरूरतो के लिए बरसत आना पडता है लेकिन उनको बाजार में आने पर बरसत में भारी जाम से झूजना पडता है। हजारो लोगो की बहुत पुरानी मंाग थी कि बरसत का बाईपास बनाया जाए। अनाज मंडी में उचित व्यवस्था ना होने के कारण आस पास के हजारों किसानो का घरोैंडा आना पडता है उसके समाधान के लिए बरसत में नई अनाज मंडी के निमार्ण की मंजूरी मिल गई है। बरसत गंाव लगभग 20 गांव के सेन्टर में होने के कारण रोजाना हजारों लोगो को वंहा से गुजरना पडता है, बड़े वाहन जैसे बस,ट्रक आदि को उचित जगह पे ठहराने की जगह नही मिलती। इस बडी समस्या को देखते हुए बरसत में नया बस अडडा बनाने की मंाग को भी मंजूरी मिल गई। इसी प्रकार बरसत गांव का प्राथमिक स्वास्थय केंन्द्र भी पंचायत के भवन में चल रहा है उसके लिए भी विधायक ने मुख्यमंत्री से नया भवन बनवाने की मंजूरी दिलवा दी। बरसत व आस पास के ग्रामीणों को सुविधा के रूप में बहुत बडी सौगात मिली है।
आज गंाव बरसत में इतने विकास कार्यो को मंजूरी मिलने की खुशी में गांव के सरपंच महेश कुमार ने ग्रामीणेा के साथ मिल कर लडडू बांट कर व ढोल नगाडों के साथ विधायक हरविन्द्र कल्याण का धन्यवाद किया। इस मौके पर नरेन्द्र पसरीचा, साहब सिंह, अनिल सेन, सुरेश, रामदास, सुभाष महल, बख्शीश आदि ग्रामीण रहे।

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