आज शुगर मिल में पत्रकारों से बातचीत भाली आनंदपुर सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक दलबीर सिंह फौगाट

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भाली आनंदपुर सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक दलबीर सिंह फौगाट ने बताया कि मिल ने वर्ष 1956 में हुई स्थापना के बाद वर्तमान सत्र के दौरान 48 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके साथ ही मिल ने 4 लाख 43 हजार 50 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है।
प्रबंध निदेशक आज शुगर मिल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मिल की उपलब्धियों बारे जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि चीनी मिल ने गन्ने की पिराई व चीनी उत्पादन के साथ-साथ 2 करोड़ 73 लाख 39 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन करके लगभग 11 करोड़ 30 लाख रुपए की बिजली बिजली निगम को निर्यात की है। उन्होंने बताया कि लगभग 168 कार्य दिवस के दौरान चीनी मिल ने लगभग 50 लाख रुपए की बगास की बचत की है और 30 अप्रैल तक किसानों की 137 करोड़ रुपए की बकाया राशी का भुगतान कर दिया गया है। गत 15 मई तक मिल में गन्ना डालने वाले किसानों की शेष राशी का भी शीघ्र ही भुगतान कर दिया जाएगा।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि आगामी सत्र में लगभग 45 हजार एकड़ क्षेत्र मेें गन्ने की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि चालू सत्र में 42 हजार एकड़ क्षेत्र था। आगामी सत्र में किसी तरह की दिक्कत पेश न आये, इसके लिए मिल के सभी पदाधिकारियों के साथ बेहत्तर ढंग से कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार आगामी सत्र एक माह पूर्व ही शुरू कर दिया जाएगा, जिससे किसानों को किसी तरह की समस्या नहीं आने दी जाएगी। आगामी सत्र 1 नवम्बर से ही शुरू कर दिया जाएगा। इससे गन्ने की अगेती खेती करने वाले किसानों को भरपूर लाभ मिलेगा और समय पर उनका गन्ना मिल में आ सकेंगा। उन्होंने बताया कि इस चीनी मिल में रोहतक सहित साथ लगते भिवानी, दादरी, झज्जर जिलों से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी से किसानों का गन्ना आता है। प्रदेश की 9 सहकारी चीनी मिलों में से सबसे कम राशी खर्च करके मिल ने रिकार्ड उत्पादन किया है। इसके लिए मिल प्रबंधन, पदाधिकारी व किसान बधाई के पात्र है।
श्री फौगाट ने बताया कि चालू सत्र के दौरान पिराई की गई गन्ने से 9.28 प्रतिशत चीनी की रिक्वरी हुई है, जो मिल के भाली आनंदपुर में स्थानांतरित होने के बाद सात पिराई सत्रों में अब तक की सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि किसानों के गन्ने का भुगतान करने के लिए रोहतक चीनी मिल द्वारा 11.50 करोड़ रुपए की राशी सरकार से ऋण के रूप में ली गई है, जो हरियाणा की अन्य सहकारी चीनी मिलों की अपेक्षा सबसे कम है। इस अवसर पर चीफ इंजीनियर सतीश सैनी, सेल्ज मैनेजर धर्मपाल, मुख्य लेखा अधिकारी मनोज कुमार व श्रम अधिकारी जगत सिंह बूरा, सुरेंद्र सिंह सहित अन्य मिल अधिकारी मौजूद थे।

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