फसलों के अवशेष जलाना किसी भी प्रकार से हितकर नहीं: तहसीलदार रोहताश पंवार

फसलों के अवशेषों के सदुपयोग के लिए 40 से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध
-तहसीलदार के नेतृत्व में निरीक्षण टीम ने गांवों का दौरा कर सीएचसी के यंत्रों का किया निरीक्षण
गन्नौर, 23 अगस्त।      फसलों के साथ किसानों की स्थिति को सुदृढ़ करने में जुटी सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की है। इसके तहत विभिन्न गांवों में कस्टमर हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित किये जायेंगे, जिनमें ये कृषि यंत्र किराये पर भी उपलब्ध रहेंगे। ऐसे प्रस्तावित सीएचसी में तहसीलदार रोहताश पंवार ने निरीक्षण टीम के साथ गुरुवार को कृषि यंत्रों की उपलब्धता का निरीक्षण किया।
फसल अवशेष प्रबंधन इन सीटू मैनेजमेंट के अंतर्गत एसडीएम सुरेंद्रपाल की अध्यक्षता में उपमंडल गन्नौर की निरीक्षण टीम का गठन किया गया है। निरीक्षण टीम में तहसीलदार सहित बीडीपीओ, एडीओ और एआईपीआरओ को शामिल किया गया है। एसडीएम के निर्देशानुसार निरीक्षण टीम ने सीएचसी के लिए आवेदन करने वाले गांवों में जाकर खरीदे गये कृषि यंत्रों की जांच की। तहसीलदार रोहताश पंवार के नेतृत्व में कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) डा. संदीप बजाज तथा सहायक सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी (एआईपीआरओ) बिजेंद्र कुमार ने आठ गांवों का दौरा किया।
दौरे की शुरुआत गुमड़ गांव से की गई, जहां आवेदक नरेश पहल द्वारा सीएचसी के लिए खरीदे गए कृषि यंत्रों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद गांव सैय्याखेड़ा, बजाना खुर्द, सिटावली, कामी, दातौली, भिगान और बड़ी गांवों में प्रस्तावित सीएचसी एवं कृषि यंत्रों का जायजा लिया गया। तहसीलदार रोहताश पंवार ने सभी केंद्रों में कृषि यंत्रों की सूची का बिलों से मिलान किया। उन्होंने बताया कि सीएचसी के लिए आठ कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत की सब्सिडी दी गई है, जिनमें रोटावेटर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, पेडी स्ट्रा चोपर, शर्ब मास्टर, रिवर्सिबल एम बी प्लो और रोटरी स्लेशर कृषि यंत्र शामिल हैं, जिनकी मदद से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा सकता है। इनके अलावा अन्य 35 प्रकार के कृषि यंत्रों पर किसानों की सहायता के लिए 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बार ट्रैक्टर पर भी 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी है।
इस दौरान तहसीलदार रोहताश पंवार ने किसानों का आह्वान किया कि वे फसलों के अवशेषों को न जलायें। ऐसा करना किसी भी प्रकार से हितकारी नहीं है। फसल अवशेष जलाने से किसानों को ही नुकसान होता है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होती है, जिससे पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को खाद आदि पर अधिक खर्च करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन किया जाना चाहिए, जिससे किसानों को विशेष लाभ मिलेगा। अवशेष तो भूमि के लिए लाभकारी होते हैं, जिन्हें मिट्टी में ही रहने देना चाहिए।
इस मौके पर एडीओ डा. संदीप बजाज ने कहा कि जो किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र नहीं खरीद सकते, वे इनको किराये पर ले सकते हैं। इसके लिए सीएचसी स्थापित किये जा रहे हैं।

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