देखिए जनाब क्या है जमाना, बेटी ही नहीं , मुश्किल है बेटों को भी बचाना ?

बेदर्द पिता नकारा, अपने ही खून को
सरकार द्वारा दिया गया नारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ. बेटी तो क्या? लोग नही करते बेटो की भी परवाहI संजय कॉलोनी की एक बेटी जो कि गांव निंबरी में विवाहित थी डिलीवरी के दौरान उसकी मौत हो गई और उसका मासूम बच्चा भी बहुत ज्यादा बीमार है लड़की के मां बाप उसे सिविल हस्पताल से मल्होत्रा हस्पताल मॉडल टाउन में ले गए, परिवार वाले मेहनतकश मजदूर हैं व किराए के मकान में रहते हैं उन्होंने अब तक जितना भी पैसा बच्चे पर लगाया सब लोगों से 10-10, 20-20 रुपए इकट्ठे कर लगाया I
इस दौरान उन्होंने बच्चे के पिता व परिवार को काफी संदेश भेजें , लेकिन परिवार में से कोई भी बच्चे की जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं हैI दूसरी तरफ बेटी की तेरहवीं पर जब परिवार के लोग पहुंचे तो लड़की की भाभी के साथ उन्होंने मारपीट भी की। ऐसे में अगर यह लोग उन्हें बच्चा सौंप भी दें तो क्या होगा? बच्चे का भविष्य, दूसरी और डॉक्टर का कहना है कि अगर बच्चे का सही तरीके से इलाज ना करवाया गया तो कुछ भी हो सकता है। बच्चे के नाना नानी के पास भी इतना पैसा नहीं है कि वह बच्चे का इलाज करवा सकें I

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