नगर निगम पानीपत nagar nigam panipat

नगर निगम और ठेकेदार की मिली भगत से हो रहे करोड़ों के घोटाले : स्वामी

भ्रष्टाचार की हुई हद

पानीपत : उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के बाद पूर्व जिला पार्षद एवं प्रधान जन आवाज सोसायटी के प्रधान जोगेन्द्र स्वामी ने कहा नगर निगम अधिकारियों और ठेकेदार की मिली भगत से करोड़ों के घोटाले हो रहे है। उन्होने कहा कि जे ई से लेकर आयुक्त तक इस षडयंत्र में शामिल एक विशेष समूह अपने चेहते ठेकेदार कृष्ण हुडडा (पार्वती इंटरप्राइजिज) को फायदा पहुंचाने के लिए हर रोज नए नियम बना रहे है। जो हिन्दुस्तान की किसी भी नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम ही नहीं अपितु किसी भी सरकारी संस्था में इस प्रकार के नियम नहीं है।

उन्होने कहा कि पहले आयुक्त नगर निगम द्वारा 1 साल की 5 करोड़ की टर्नओवर पर 12 प्रतिशत मुनाफा होने की शर्त रखी जिस पर 27 अगस्त को हम लोगो ने पत्रकार वार्ता कर विरोध किया। परन्तु तब तो वो टैण्डर हटा लिए लेकिन पार्वती इंटरप्राइजिज को फायदा पहुंचाने के लिए 3 साल की टर्न ओवर पर 8 प्रतिशत मुनाफा कमाने वाली कम्पनी को टैण्डर देने की शर्त रख दी।

15 करोड़ के सिंगल टैण्डर 23% मुनाफे पर

दूसरे 50 लाख से नीचे के टैण्डर 13% से 14% माइनस पर 

इस मामले में एक पार्क का टैण्डर लगाया गया, जिसका पानीपत से बाहर की कम्पनी द्वारा टैण्डर लगा दिया गया। जिसकी टर्नओवर 10 करोड़ थी, उसको बागवानी का सर्टिफिकेट ना होने का हवाला देकर उस कम्पनी को अमान्य कर दिया गया। जबकि उस कम्पनी के अम्बाला में लगभग 9-10 करोड़ के पार्को के ही कार्य चल रहे थे। उसको रद्द करने के बाद सिंगल टैण्डर जो 15 करोड़ के थे, 23 प्रतिशत मुनाफे पर एच एस आर के साथ पार्वती इन्टरप्राइजिज को दे दिया गया। जबकि दूसरे 50 लाख से नीचे के टैण्डर 13 से 14 प्रतिशत माइनस पर गये।

जिससे स्पष्ट होता है कि अगर आयुक्त नगर निगम शर्तो का खेल ना खेलते तो पार्वती इंटरप्राइजिज को 37 प्रतिशत प्रोफिट के हिसाब से सरकार को 5.50 करोड़ का चूना नहीं लगता। यह सीधे रूप से निगम में पार्वती इंटरप्राइजिज के लिए कार्यरत एक अधिकारियों के एक गुट का कार्य है। उन्होने कहा कि 2-3 साल में लगभग 100 करोड़ रुपया पार्को के विकास कार्य के लिए दिया जा चुका है। जिसमें 23 करोड़ हाली पार्क का अलग से है।

अब नगर निगम के कुछ अधिकारी जो पार्क बहुत अच्छी स्थिति में है। जिनकी आधे से ज्यादा ठेकेदारों की तो अब तक सिक्योरिटी तक भी वापिस नहीं हुई है और उन पार्को के रिपेयर और मैनटेन्स के नाम पर अलग-अलग से 15 करोड़ के टैण्डर पार्वती इन्टरप्राइजिज के नाम से छोड़ दिए गये। सैक्टर 11-12 में 3.82 करोड़ का रिपेयर का कार्य दिया गया। जबकि इनमें कुछ पार्को का कार्य तो अभी तक पूरा भी नहीं हुआ।

9 करोड़ 26 लाख के लगाए गए टैण्डर के लिए 10 करोड़ से अधिक का लाइसैंस कि मांग

जो कम्पनी एन एच आई पर पानीपत से सोनीपत का लगभग 2 हजार करोड़ का कार्य कर रही है वह भी हमारी निगम में टैण्डर लेने के योग्यता नहीं रखती। उन्होने कहा कि इससे बड़ी हैरत की बात और क्या हो सकती है कि आयुक्त नगर निगम द्वारा जो टैण्डर 9 करोड़ 26 लाख के लगाए गए उनके लिए 10 करोड़ से अधिक का लाइसैंस मांग लिया गया । साथ ही 8 प्रतिशत का मुनाफा दूसरा 6.32 करोड़ का टैण्डर लगाया जिसका लाइसैंस 7 करोड़ से ज्यादा 8 प्रतिशत मुनाफा की शर्त रखी गई। एक टैण्डर 4.82 करोड़ का लगाया गया। जिसका लाइसैंस 5 करोड़ से ज्यादा का मांगा ।

यानि 5 करोड़ का लाइसैंस रखने वाला ठेकेदार भी इस टैण्डर को नहीं ले सकेगा। स्वामी ने कहा कि नगर निगम जब इतने बड़े टैण्डर लगा रहा है तो और उसमें वह पी डब्ल्यू डी (बी एण्ड आर) का हवाला देता है तो फिर पी डब्ल्यू डी (बी एण्ड आर) की टैण्डर लगाते हुए शर्ते क्यों नहीं मानी जाती। क्योंकि अगर उनकी शर्त मानी जाएगी तो ठेकेदार कृष्ण हुडडा की कम्पनियों को ठेका नहीं दिया जा सकता। लेकिन नगर निगम में लूटने की मंशा से बिड कपेस्टिी को खत्म कर दिया गया और जिस कम्पनी की टर्न ओवर केवल 5 करोड़ है। उस कम्पनी को नगर निगम पहले ही 15 करोड़ के टैण्डर दे चुका है और 30 करोड़ के कार्य उसके लिए और लगा दिये गये है।

 

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