अजय चौटाला इनेलो

मुझे पार्टी से क्यों निकाला, इनेलो में कौरव व पांडवों वाली स्थिति: अजय चौटाला

चंडीगढ़। अजय चौटाला ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से अपने निष्कासन को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि यह समझ से परे है कि मुझे पार्टी से क्यों निकाला गया, मेरा कसूर क्या है? नई पार्टी बनाने के संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि जींद में कार्यक्रम पार्टी के नाम से होगा। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि इनेलो में कौरव और पांडव जैसी स्थिति है।


जिंदाबाद के नारे लगाए थे जिसे हुल्लड़ बाजी करार दिया

उन्होंने कहा कि मुझ पर क्या आरोप है, मुझे खुद यह मालूम नहीं लेकिन दुष्यंत और दिग्विजय पर 7 तारीख की गोहाना रैली में अनुशासनहीनता बरतने के आरोप थे। हालांकि यह आरोप सही नहीं थे। लोगों ने वहां जिंदाबाद के नारे लगाए थे जिसे हुल्लड़ बाजी करार दिया गया। जब आपने हुड़दंग करने वाले लोगों को पहचान लिया था तब दुष्यंत और दिग्विजय को किस बात की सजा दी गई।

अजय चौटाला ने कहा कि मुझे पार्टी से निकालने वाले लोगों को इसका कोई अधिकार नहीं है। मैं खुद हैरान हूं कि मुझे किस अधिकार के तहत निकाला गया है। अजय चौटाला ने कहा कि वह चौधरी देवीलाल की अंगुली पकड़कर चलना सीखे थे और उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते रहेंगे।



कहा कि गोहाना रैली में केवल पार्टी जिंदाबाद के नारे लगे

अजय चौटाला ने यमुनानगर में कहा कि गोहाना रैली में केवल पार्टी जिंदाबाद के नारे लगे। दुष्यंत और दिग्विजय पर हूटिंग का आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पता चला है कि अब मुझे भी पार्टी से निकाल दिया गया है। ऐसा क्यों किया गया, इसका मुझे पता नहीं। मैं तो किसी रैली में भी नहीं गया। पार्टी किसी एक की नहीं है। पार्टी कार्यकर्ताओं की है।

उन्होंने कहा, ओपी चौटाला हमेशा पांडवों व कौरवों का उदाहरण देते थे। अब वहीं स्थिति यहां बनी हुई है। पांडवों को कौरवों ने कुछ नहीं दिया। ऐसी ही हालत हमारी हो गई है। अब युद्ध होगा। 17 नवंबर को होने वाली प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में वह शामिल होंगे। उसके बाद ही अगली रणनीति तय होगी।

अंबाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अजय चौटाला ने कहा कि निष्कासन का अधिकार पार्टी महासचिव को होता है। जब पार्टी बनी तब चुनाव आयोग में उनके हस्ताक्षर हुए थे। निष्कासन करने वाले लोगों को पता होना चाहिए जब वे पैदा नहीं हुए थे तब पार्टी उनके हस्ताक्षर से बनी थी। उन्होंने कहा कि नैना चौटाला का निष्कासन अभी तक इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इससे विधानसभा में नेता विपक्ष का रूतबा चला जाएगा।


कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी से इस्‍तीफे का एेलान कर दिया

अजय चौटाला के यमुनानगर पहुंचते ही पार्टी से निष्कासित करने की खबर मिली, तो उनके साथ साढ़ौरा हलके के कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी से इस्‍तीफे का एेलान कर दिया। अंबाला में भी कार्यकर्ताओं ने हाथ खड़े कर पार्टी से अपना सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा भी की।

अंबाला में अजय चौटाला के साथ रैली में पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी बांगड़ ने कहा कि वर्ष 1998 में पार्टी बनी तो संविधान उन्होंने स्वयं लिखा था। अजय चौटाला को प्रधान महासचिव बनाया गया था। पार्टी के पंजीकरण और चुनाव चिह्न आवंटित कराने के दस्तावेजों पर अजय चौटाला के हस्ताक्षर हैं। वह अब कानूनी तौर पर संस्थापक हैं।


 

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