भारत में एक करोड बच्चे आटिज्म बच्चे बीमारी से पीडित है-डा. नदिनी गोलकुलचद्रंन

हिसार। डा. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा ्िकऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसार्डर एएसडी बचपन की आम न्यूरो साइकिएट्रिक बीमारियों में से एक है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 68 में से एक बच्चे में यह समस्या पाई गई है और भारत में हर 250 में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीडि़त है लोगों में जागरूकता कि कमी से संख्या और भी बढ़ रही है।

बच्चे का ऑटिज्म पीडि़त होना अधिकांश माता पिता के लिए जीवन को बदलने वाला अनुभव होता है। ऑटिस्टिक लक्षणों वाले ऑटिज्म ग्रस्त बच्चे की परवरिश अभिभावकों के लिए खासकर माताओं के लिए एक निरंतर चुनौती की तरह होता है। डा. नदिनी ने यह जानकारी देते हुए पत्रकारों को बताया कि  ऑटिज्म बचपन का एक विकार है जो बोलने में दिक्कत देता है अतिसक्रियता आक्रमक व्यवहार और सामाजिक संपर्क में कठिनाई के परिणाम प्रकट करता है।

वर्तमान में भारत में तकरीबन एक करोड़ बच्चे इससे प्रभावित हैं  जिनका दवाओं के सहारे लाक्षणिक राहत विशेष शिक्षा ऑक्युपेशनल स्पीच और व्यवहार थेरेपी के साथ इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 16 दिसंबर को हिसार में निशुल्क कैंप का आयोजन किया जाएगा। असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीज इस नि:शुल्क शिविर में परामर्श के 9821529653 पर संपर्क कर सकते है। डा.नदिनी ने बताया कि हिसार के जय बामेल नामक बच्चे आटिज्म से पीडिता था।

बच्चे के परिजन उनसे काफी मुबई में मिले। उनकी सलाह पर लड़के पिता ने संदीप ने न्यूरोजेन बीएसआई से संपर्क किया और अधिक मार्गदर्शन पाने में रुचि दिखाई। जय की उम्र 10 साल था। मार्च 2018 में परीक्षण करने पर जय की मुख्य समस्याओं में यह पाया गया कि उसे कोई काम करने के लिए बार.बार निर्देश देने की जरूरत पड़ती थी और इसके बावजूद असंगतता दिखाई देती थी। उसकी ध्यान देने  की अवधि उसके मूड पर निर्भर थी तब उसका सफल ईलाज किया गया। जय के पिता संदीप और माता श्रीमती सोमी का कहना है अब तक जहां इस समस्या का कोई उपचार नहीं उपलब्ध था हमने अपने बच्चे में  सुधार के लिए
इस नई अवधारणा को आजमाने का प्रयास किया।

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