दिल्ली में वायु गुणवत्ता पर असर डालने वाले पदूषकों की पहचान के लिए होगा अध्ययन

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण में उतार-चढ़ाव की निगरानी तथा विशिष्ट प्रदूषकों की पहचान के लिए एक जाने माने थिंक टैंक के साथ मिलकर प्रयोग के तौर पर एक अध्ययन करेगी ताकि प्रदूषण में आकस्मिक वृद्धि की स्थिति में जरुरी उपाय तैयार किया जा सके।

सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरोनमेंट (सीएसई) के उपमहानिदेशक चंद्रभूषण ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में परिवेशी वायु स्रोत अनुपात अध्ययन में जापानी उपकरण कंपनी होरिबा द्वारा प्रदत्त उपकरण का इस्तेमाल किया जाएगा । यह उपकरण राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण स्तर की समयोचित निगरानी कर सकता है।

इस अध्ययन का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान करना और उच्च प्रदूषण संभावित चुनिंदा स्थलों पर स्रोतों के उदगम का ब्योरा जुटाना है।

द्र भूषण ने कहा, ‘‘तीन महीने के इस अध्ययन के दौरान दिल्ली एनसीआर के विभिन्न स्थानों के मूलाधार आंकड़े जुटाये जाएंगे। इसकी स्वतंत्र अध्ययन की योजना तैयार की गयी है जिसमें एक्सआरएफ और बीटा रे शमन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के मूलाधारों का पता चलने के बाद समय से उनका विश्लेषण हो पाएगा और नियमाकों को शीघ्र ही सुधार के उपाय करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रदूषण की स्थिर निगरानी से काम नहीं चलेगा। हमें यथाशीघ्र कदम उठाने के लिए गतिशील निगरानी की जरुरत है।’’

डीपीसीसी के वायु गुणवत्ता संभाग के प्रमुख मोहन जी जॉर्ज ने कहा कि प्रदूषण स्तर में आकस्मिक वृद्धि के बारे में भिन्न भिन्न समझ है और इस अध्ययन से उसकी हमारी समझ सुधरेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें आशा है कि उसकी समझ में सुधार आने से अनुक्रमित जवाबी कार्ययोजना को और प्रभावी तरीके से लागू करना संभव होगा। ’’

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