अब बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर असमंजस में अभिभावक

बहादुरगढ़- सरकार के नौवीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूली बच्चों के लिए स्कूल खोलने के फैसले के बाद अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अभिभावक असमंजस में हैं। परिजन दुविधा में हैं कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मामलों को देखते हुए वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें या न भेजें। हरिभूमि प्रतिनिधि रवींद्र राठी से विशेष बातचीत में मौजूदा स्थिति को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में बहुत कम अभिभावक मिले। बता दें कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार सोमवार (आज) से छात्र अभिभावकों की अंडरटेकिंग के बाद शिक्षक से समय लेकर स्कूल जा सकते हैं।स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं श्री रामा भारती पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र दीपांशु राठी के पिता प्रवीण कुमार का कहना है कि बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए बच्चे को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। बस से सफर करने और पूरा दिन क्लॉस में अन्य बच्चों के साथ बैठने से संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। बच्चे की जिंदगी पहले है, इसीलिए वे अपने बेटे को स्कूल नहीं भेजेंगे।

 

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्कूल कैसे भेज सकते हैं स्कॉलर्स ग्लोबल में 10वीं कक्षा की छात्रा लतिका के पिता अशोक राठी ने कहा कि बेटी को कोरोना के बढ़़ते मामलों के बीच स्कूल कैसे भेज सकते हैं। बच्चे की पढ़ाई और उसके स्वास्थ्य दोनों की चिंता है। लेकिन बच्चे की जिंदगी को खतरे में नहीं डाला जा सकता। स्कूल में एक बच्चे से दूसरे को संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। ऑनलाइन पढ़ाई ठीक है, कम से कम बच्चे तो सुरक्षित हैं।स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं श्री रामा भारती पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र दीपांशु राठी के पिता प्रवीण कुमार का कहना है कि बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए बच्चे को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। बस से सफर करने और पूरा दिन

क्लॉस में अन्य बच्चों के साथ बैठने से संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। बच्चे की जिंदगी पहले है, इसीलिए वे अपने बेटे को स्कूल नहीं भेजेंगे। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्कूल कैसे भेज सकते हैं स्कॉलर्स ग्लोबल में 10वीं कक्षा की छात्रा लतिका के पिता अशोक राठी ने कहा कि बेटी को कोरोना के बढ़़ते मामलों के बीच स्कूल कैसे भेज सकते हैं। बच्चे की पढ़ाई और उसके स्वास्थ्य दोनों की चिंता है। लेकिन बच्चे की जिंदगी को खतरे में नहीं डाला जा सकता। स्कूल में एक बच्चे से दूसरे को संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। ऑनलाइन पढ़ाई ठीक है, कम से कम बच्चे तो सुरक्षित हैं।

बच्चों को स्कूल भेजकर जान जोखिम में नहीं डाल सकते बाल भारती स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा जाह्नवी के पिता वीरेंद्र वत्स कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजकर जान जोखिम में नहीं डाल सकते। यह साल जान बचाने का है, क्यों बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करें। इस कोरोना महामारी को लेकर पहले कभी अनुभव नहीं रहा है। किशोरों द्वारा कोरोना से बचाव के नियमों के पालन को लेकर संशय है। बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते सेंच्युरी स्कूल में 12वीं की छात्रा मेघना वहरदयाल स्कूल में 11वीं के छात्र उपांशु के पिता बिजेंद्र राठी का कहना है कि हम अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते। एक बच्चे को भी अगर कोरोना होगा, तो वह सभी बच्चों तक फैल जाएगा। हम बच्चों को कहां तक देखेंगे। प्रतिदिन बढ़ रहे संक्रमण के प्रकोप के बीच हमें अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर लग रहा है। बच्चों की शंका दूर करने की हर संभव कोशिश की जाएगी डीपीएस स्कूल की कोऑर्डिनेटर दिव्या राठी का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार स्कूल आने वाले बच्चों की शंका दूर करने की हर संभव कोशिश की जाएगी। अभिभावकों की लिखित अनुमति के बिना किसी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अभी सीमित मात्रा में ही छात्रों को स्कूल आने की अनुमति प्रदान की जाएगी। शिक्षक स्कूल से ही नियमित ऑनलाइन क्लॉस ले रहे हैं।

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