एसडी पीजी कॉलेज ने राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस, मनाया संकल्प के साथ

एसडी पीजी कॉलेज ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सानिध्य में वेबिनार के माध्यम से

राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस को संकल्प के साथ मनाया

इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दिया गया

एसडी पीजी कॉलेज एनएसएस इकाइयों ने राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस को कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सानिध्य में वेबिनार के माध्यम से सम्पूर्ण संकल्प के साथ मनाया जिसमे कॉलेज एनएसएस इकाइयों के कार्यकर्ताओं सहित कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी भी सम्मिलित रहे. वेबिनार के माध्यम से कुरुक्षेत्र विश्वविधालय की कुलपति डॉ नीता खन्ना और विश्वविधालय में एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ दिनेश राणा ने सभी कोलेजो के एनएसएस अधिकारियो और प्राचार्यों को इस शुभ अवसर की बधाई देते हुए उनसे वर्ष 2019-20 सत्र में हासिल की गई एनएसएस
उपलब्धियों और क्रिया कलापों का ब्यौरा भी लिया

एनएसएस कार्यकर्ताओं ने सामाजिक दूरी रखते हुए कॉलेज स्टाफ सदस्यों के साथ मिलकर कॉलेज में पौधे भी आरोपित किये और समाज को पर्यावरण बचाने का
सन्देश दिया. विदित रहे की एनएसएस के माध्यम से युवा छात्रों के व्यक्तित्व और चरित्र के विकास के प्राथमिक उद्देश्य से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) को 1969 में शुरू किया गया था. शुरूआत में इसे 37 विश्वविद्यालयों में शुरू किया गया था जिसमें लगभग 40,000 स्वयंसेवियों को शामिल किया गया था. परन्तु
समय बीतने के साथ यह एक अखिल भारतीय कार्यक्रम बन गया. एनएसएस के अंतर्गत आने वाले शैक्षणिक संस्थानों की संख्या में प्रतिवर्ष बढ़ोत्तरी हो रही है. वर्तमान में 39,695 एनएसएस इकाइयों में 36.5 लाख से अधिक स्वयंसेवी हैं जो देश के 391 विश्वविद्यालयों, 16,278 कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों तथा 12,483 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में फैले हुए हैं. इसकी स्थापना के बाद से लगभग 4.78 करोड़ छात्रों को इससे लाभ हुआ है.

एसडी पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा एवं प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने इस अवसर पर कॉलेज द्वारा एनएसएस में आयोजित विभिन्न कार्यों का ब्यौरा माननीय कुलपति को वेबिनार के माध्यम से दिया जिसकी कुलपति डॉ नीता खन्ना ने सराहना की. कॉलेज एनएसएस ने गत वर्ष साक्षरता, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं की स्थिति, आपदा तथा पुनर्वास संबंधी कार्यक्रम, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान, डिजिटल भारत, कौशल भारत, योग, रक्त दान शिविर इत्यादि पर अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन किया.

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस के बारे में बताते हुआ कहा की प्रत्येक एनएसएस स्वयंसेवी को प्रति वर्ष कम से कम 120 घंटे अर्थात दो साल में 240 घंटे की सेवा करना अनिवार्य है. यह कार्य एनएसएस शाखाओं द्वारा अपनाए गए गांव, स्कूल या कॉलेज परिसरों में किया जाता है. आमतौर पर
अध्ययन के घंटों के बाद इसे सप्ताहांत या फिर छुट्टियों के दौरान किया जाता है. इसके अलावा प्रत्येक एनएसएस इकाई स्थानीय समुदायों को शामिल करके कुछ विशेष परियोजनाओं के साथ छुट्टियों में अपनाए गए गांवों या शहरी झुग्गियों में 7 दिनों की अवधि के विशेष शिविरों का आयोजन करती है जैसा कॉलेज प्रत्येक
वर्ष करता आ रहा है. प्रत्येक स्वयंसेवक को 2 वर्ष की अवधि के दौरान एक बार विशेष शिविर में भाग लेना जरूरी होता है जिसके बदले में विश्वविधालय स्वयंसेवियो को सर्टिफिकेट जारी करता है जिसका छात्रों के भविष्य में महतवपूर्ण स्थान होता है.

एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा की एनएसएस इकाइयां उस गतिविधि का आयोजन करती है जो समुदाय के लिए सबसे ज्यादा प्रासंगिक हो. मुख्य गतिविधियों में शिक्षा और साक्षरता, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा कार्यक्रम, महिलाओं की स्थिति में सुधार, उत्पादन उन्मुख कार्यक्रम, आपदा राहत तथा पुनर्वास संबंधी कार्यक्रम, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान, डिजिटल भारत, कौशल भारत, योग इत्यादि जैसे
कार्यक्रमों शामिल है. इन सभी विषयों पर अधिक से अधिक लोगों को जागरूकता करना ही एनएसएस का मूल ध्येय है.
एसडी पीजी कॉलेज प्रधान श्री पवन गोयल ने अपने सन्देश में एनएसएस दिवस की बधाई देते हुए कहा की एनएसस कार्यकर्ता अपने कार्यक्रम पदाधिकारी के साथ मिलकर एनएसएस के अंतर्गत दैनिक एवं विशेष शिविर के माध्यम से गोद लिए गए गांव तथा समाज में स्वैच्छिक कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में
अपनी भूमिका निभाते है जिससे उनके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता एवं सामूहिक कार्य करने का विकास होता है. यही गुण राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. उन्होनें कहा की बेशक एनएसएस केंद्र सरकार का कार्यक्रम है फिर भी केंद्र सरकार, राज्य और शैक्षिक संस्थान इस कार्यक्रम के तीन स्तंभ हैं. देशभर के एनएसएस शैक्षिक संस्थानों का प्रभावी संचालन सीधे केंद्रीय युवा और खेल मंत्रालय के माध्यम से करना अंसभव है और इसीलिए केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी सहयोग के कारण इसका शैक्षिक संस्थानों में कार्यान्वयन संभव हो सका है. हर छात्र को चाहिए की वह कम से कम एक बार एनएसएस से जरुर जुड़े.

 

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