राज्यमंत्री कमलेश ढांडा बोली, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनेता ही नहीं बल्कि चितंक, लेखक व विचारक भी थे

हरियाणा सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 104वीं जयंती के अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी हैं. उनके बताए सिद्धांतों और आदर्शों पर चलते हुए हम सभी जनसेवा में रत हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के पुरोधा बहुमुमखी प्रतिभा के धनी और जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल ने अंत्योदय के सिद्धांत पर अपना संपूर्ण जीवन किसान, कमेरे, गांव, गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित व वंचितों के उत्थान के लिए न्योछावर कर दिया. उनके द्वारा प्रदान की गई एकात्म मानववाद व अंत्योदय की प्रगतिशील सोच संगठनात्मक कार्यों की नींव है और प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए प्रेरणादायी है और उनका पथ प्रदर्शन भी करती है.

हरियाणा सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 104वीं जयंती के अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी हैं. उनके बताए सिद्धांतों  और आदर्शों पर चलते हुए हम सभी जनसेवा में रत हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के पुरोधा बहुमुमखी प्रतिभा के धनी और जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल ने अंत्योदय के सिद्धांत पर अपना संपूर्ण जीवन किसान, कमेरे, गांव, गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित व वंचितों के उत्थान के लिए न्योछावर कर दिया. उनके द्वारा प्रदान की गई एकात्म मानववाद व अंत्योदय की प्रगतिशील सोच संगठनात्मक कार्यों की नींव है और प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए प्रेरणादायी है और उनका पथ प्रदर्शन भी करती है.

व्यक्तिगत जीवन में उनकी कोई महत्वाकांक्षा भी नहीं थी. उन्होंने अपना जीवन समाज और राष्ट्र को समर्पित कर दिया था. यही बात उन्हें महान बनाती है. राजनीति में लगातार सक्रियता के बाद भी वह अध्ययन व लेखन के लिये समय निकालते थे. इसके लिये वह अपने विश्राम से समय कटौती करते थे. इसी में लोगों से मिलने जुलने और अनवरत यात्राओं का क्रम भी चलता था. आमजन के बीच रहना उन्हें अच्छा लगता था. यही कारण था कि वह देश के आम व्यक्ति की समस्याओं को भलीभांति समझते थे. यह विषय उनके चिंतन व अध्ययन में समाहित था. इनका वह कारगर समाधान भी प्रस्तुत करते थे. उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में संघर्ष व त्याग की मिसाल पं. दीनदयाल शिक्षा, संस्कृति, राजनीति और साहित्य आदि सभी में चाहते थे राष्ट्रीय चेतना की प्रतिध्वनि मुखर रूप में अभिव्यक्त हो. राजनीति उनके लिए जनसेवा का सबसे बड़ा माध्यम था और जन समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहते थे. उनके दिखाए मार्गों का हम सभी को अनुसरण करना चाहिए. तभी हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे.

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