यौन शोषण के मामलों में दोषी को किया जा सकता है नौकरी से बर्खास्त- पी.के. महापात्रा। 

Photo-3अम्बाला इंडिया की दहाड़ ब्यूरो , > महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज पंचायत भवन अम्बाला शहर में कार्यक्षेत्र पर कामकाजी महिलाओं के यौन शोषण अधिनियम 2013 विषय पर मंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारम्भ विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के. महापात्रा ने किया और इस अवसर पर विभाग की निदेशक श्रीमती रेणू फूलिया, यमुनानगर के उपायुक्त डा0 एस.एस. फुलिया, अम्बाला के उपायुक्त प्रभजोत सिंह, अतिरिक्त उपायुक्त आर.के. सिंह, नगराधीश श्रीमती प्रतिमा चौधरी, बराडा के एसडीएम गिरीश कुमार सहित अम्बाला मंडल के सभी जिलों के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पी.के. महापात्रा ने इस अवसर पर कहा कि कार्यक्षेत्र पर महिलाओं के साथ शारीरिक, भावानात्मक शोषण के साथ-साथ कोई भी ऐसी गतिविधि जिससे महिला के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे यौन शोषण की संज्ञा में आता है। उन्होंने कहा कि यौन शोषण बचाव, निषेध और समाधान अधिनियम 2013 के अंतर्गत ऐसे प्रत्येक संस्थान जहां 10 कर्मचारी सेवा करते हैं में यौन शोषण रोकने के लिए इंटरनल कम्पलेट कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भी प्रावधान है कि इस कमेटी की अध्यक्षता केवल महिला कर्मी ही करेगी और उसमें 50 प्रतिशत सदस्य भी महिलाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी कमेटियों में गैर सरकारी सदस्य का प्रावधान भी किया गया है और वह सदस्य भी महिला ही होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान जहां 10 कर्मचारी काम कर रहे हैं लेकिन उनमें एक भी महिला नहीं है वहां भी ऐसी कमेटी का गठन जरूरी है क्योंकि उस कार्यालय में अपने किसी काम से आने वाली महिला की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए ऐसी कमेटी अनिवार्य की गई है। इसके अलावा जिला में लोकल कम्पलेट कमेटी भी जरूरी है जो यह सुनिश्चित करेगी कि जिला के सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का किसी प्रकार का शोषण न हो।
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक श्रीमती रेणू फूलिया ने इस अवसर पर कहा कि सविधान में बिना किसी लिंग-भेद के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के इस प्रावधान को सुनिश्चित करने के लिए परवेंशन ऑफ सैक्शन हरासमैंट एंड चाईल्ड अधिनियम का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला में किसी भी क्षेत्र मे अधिनियम की पालना सुनिश्चित न होने पर उस कार्यालय के मुखिया अथवा संस्थान के मालिक को जिम्मेवार मानकर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी व निजी क्षेत्र में इस प्रावधान की उल्लघंना पर नौकरी से बर्खास्त करने के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाईयों का प्रावधान भी किया गया है। उन्होने कहा कि ऐसा न होने पर 50 हजार रूपये तक का जुर्माना भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इंटरनल कम्पलेट कमेटी और लोकल कम्पलेट कमेटी को सिविल कोर्ट के बराबर शक्तियां प्रदान की गई हैं।
उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि न केवल इंटरनल और लोकल कम्पलेट कमेटियों का गठन जरूरी है बल्कि रोजगार दाताओं, कर्मियों और कमेटी के सदस्यों को पूरे प्रावधान के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। उन्होने कहा कि अधिकतर मामलों में अभी तक लोग इस प्रावधान के प्रति जागरूक नहीं है। उन्होने यह भी कहा कि जिला प्रशासन के ध्यान में यौन शोषण का कोई मामला आने पर तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।
कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो0 शालिनी शर्मा और सहायक प्रो0 मीनू ने परवेंशन ऑफ सैक्सूअल हरासमैंट एवं चाईल्ड अब्यूस अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त निदेशक शशी दून, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती राजबाला कटारिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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