WCD मंत्रालय को डाकघर मंत्रालय की छवि से बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी : मेनका गांधी

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि सत्ता में आने के बाद इस मंत्रालय को परिभाषित करना और उसे ‘डाकघर मंत्रालय’ की छवि से बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी। मेनका ने यह भी स्वीकार किया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह को बिहार सरकार के आखिरकार बंद करने से छह महीने पहले उसे (राज्य सरकार को) यह जानकारी देना एक गलती थी कि वहां कुछ गड़बड़ है।

उल्लेखनीय है कि इसका (बालिका गृह का) संचालन एक एनजीओ करता था जिसे केंद्र और राज्य, दोनों से धन मिलता था। मेनका ने कहा, “हमे यह जानकारी मिली थी कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में कुछ भयंकर गड़बड़ चल रहा है और इस बारे में जानकारी राज्य सरकार से साझा कर दी गई।”

पिछले पांच बरसों में महिलाओं और बच्चों के मुद्दों से निपटने में अपने समक्ष पेश आयी चुनौतियों का जिक्र करते हुए मेनका ने कहा कि जब उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभालता था, तब उनके मंत्रालय का एक मात्र काम आंगनवाड़ी कर्मियों को तनख्वाह देना भर था। उन्होंने कहा, “शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती मंत्रालय को परिभाषित करने की थी। यह मंत्रालय 10 बरसों से अस्तित्व में था लेकिन वह अपरिभाषित था। यह सुबह से शाम तक हड़ताल पर रहने वाले आंगनवाड़ी कर्मियों को तनख्वाह देने वाला महज एक डाकघर मंत्रालय जैसा था।”

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला, तब उनके सामने दूसरी बड़ी चुनौती पूरे देश की राय लेने के लिए सभी को साथ लेकर चलना था। मंत्री ने कहा, ‘‘हमने सभी चीजों को नीति, रक्षा और आर्थिक पुनर्निर्माण – तीन श्रेणियों में विभाजित करना शुरू किया। फिर हमने केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (कारा) का पुनर्गठन किया, जो लगभग बंद था।

इसके बाद हमने राष्ट्रीय महिला कोष पर काम किया, जो उस वक्त 60 करोड़ रूपये के कर्ज में था।” उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को परिभाषित करना एक अन्य चुनौती थी। हम जानते थे कि यह बच्चों के लिए था लेकिन यह बच्चों के लिए क्या करता है, उसे समझने की जरूरत थी।”

उन्होंने कहा कि जब हमने कार्यभार संभाला, तब राष्ट्रीय महिला आयोग में 18,000 शिकायतें लंबित थीं। उन्होंने कहा, “अब राष्ट्रीय महिला आयोग में एक कानूनी परामर्श बोर्ड है। अब मंत्रालय हर चीज पर जवाब देता है।” मेनका के राज्यसभा में कम कामकाज होने पर भी अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि उच्च सदन में मानव तस्करी (रोकथाम, संरक्षण एवं पुनर्वास) विधेयक, 2018 सहित कई बड़े विधेयक अटक गए।

उन्होंने कहा, “काश, राज्यसभा ने कठिन परिश्रम किया होता। बड़े अफसोस की बात है, न सिर्फ मेरे लिए बल्कि पूरे देश के लिए। सामाजिक संरचना की कई चीजें अटक गई। यदि मानव तस्करी पर रोकथामा लगाने वाला विधेयक पारित हो जाता, तो कारा सुधार का मार्ग प्रशस्त हो जाता। इससे मुझे वाकई खुशी होती…हमे इसे मंत्रालयों से पारित कराने में लंबा वक्त लगा था।”

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