किसानों की मांग है कि भाजपा सरकार को किसानों के हितों के लिए समर्थन मूल्य पर फसल खरीद गारंटी का कानून नही बनाया गया तो प्रदेश में सरकार के खिलाफ प्रचंड किसान आंदोलन शुरू किया जाएगा।

पानीपत, 9 अगस्त।
 केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए जाने वाले सर्मथन मूल्य पर खरीद गारंटी का कानून बनाए जाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले धरना प्रदर्शन किया गया। इसके साथ साथ किसानों ने कृषि से संबधित केंद्र के तीनों अध्यादेशों को रद्द करने की मांग को लेकर शहर की सड़कों पर उतर कर सैंकडो आंदोलित किसानों ने रोष प्रदर्शन करते हुए जमकर बवाल काटा। किसानों की मांग है कि भाजपा सरकार को किसानों के हितों के लिए समर्थन मूल्य पर फसल खरीद गारंटी का कानून नही बनाया गया तो प्रदेश में सरकार के खिलाफ प्रचंड किसान आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक इस मांग को लेकर करनाल के सांसद संजय भाटिया की अनुपस्थिति में सांसद की पत्नि अंजू भाटिया को ज्ञापन सौंपा। धरने प्रदर्शन को नेतृत्व प्रदेशाध्यक्ष रतनमान व पानीपत जिला अध्यक्ष कुलदीप बलाना ने अध्यक्षता की। इससे पूर्व किसानों ने स्थानीय किसान भवन में किसान पंचायत का आयोजन किया। इस दौरान भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की गई। इस प्रदर्शन में करनाल व पानीपत जिला के भारी संख्या में किसानों ने शिरकत की। प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने  कहा कि भाकियू के प्रदेश स्तरीय ऐलान के मुताबिक प्रदेश के सभी लोकसभा व राज्य सभा तथा विपक्ष के नेताओं को अगस्त माह के दौरान ज्ञापन सौंपे जा रहे है। इसी कड़ी में रविवार को मॉडल टाऊन स्थित संजय भाटिया के आवास सांसद की पत्नि अंजू भाटिया को  ज्ञापन सौंपा गया।
इससे पूर्व कुरूक्षेत्र के सांसद नायब सेनी व हिसार के सांसद बिजेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपे जा चुके है। मान ने कहा कि अगस्त माह में अगस्त किसान क्रांति आंदोलन शुरू किया गया है। किसान विरोधी भाजपा सरकार की किसान आंदोलन गले की फांस बनेगा। आंदोलित किसानों ने किसान भवन से सांसद भाटिया के आवास तक पैदल मार्च निकालते हुए उनके आवास पर पहुंच कर धरना प्रदर्शन किया। सांसद संजय भाटिया के आवास पर न मिलने से खफा किसानों ने सांसद के खिलाफ रोष जाहिर किया। जबकि सांसद    को भाकियू की ओर से पत्र द्वारा सूचित कर दिया गया था।
किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगा कर किसान अपनी आवाज को बुलंद्व करते रहे। प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा सरकार घमंडी नेताओं का टोला है। जो किसानों की बात सुनने के लिए तैयार नही है। इसका खामियाजा सरकार को भूगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र में शासित भाजपा की सरकार खेती को प्राईवेट सेक्टर के हवाले करके किसानों की गर्दन कारपोरेट लोगों के हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है। जिसे सफल नही होंने दिया जाएगा। इसके लिए किसान किसी भी तरह की कुर्बानी देने के तैयार हो रहे है।
अगर अध्यादेश किसान हितैषी है तो मुख्यमंत्री बुलाए सर्वदलीय बैठक प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल तीनों अध्यादेशों की स्थिति को स्पष्ट करने हेतू 15 अगस्त से पूर्व प्रदेश की सभी विपक्षी दलों के नेताओं व कृषि विषशेज्ञों ओर प्रदेश सभी किसान संगठनों की सांझी बैठक बुला कर विशेष चर्चा करवाएं। चर्चा के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके साथ ही अध्यादेशों के प्रति पनप रहे रोष समाप्त होंने के साथ साथ किसानों का भ्रम भी दूर हो जाएगा।
 4 सितम्बर को रोहतक में होगी प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत अगर सरकार ने इन तीनों अध्यादेशों को जल्द वापिस नही लिया गया तो इसके विरोध आगामी 4 सितम्बर को रोहतक की नई अनाज मंडी में प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। जिसमें किसान आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी। रोहतक किसान महापंचायत के आयोजन से पूर्व भाकियू नेताओं के प्रति कही से पैसा लेने के बारे में लगाए गए आरोप के संबंध में कृषिमंत्री जे.पी.दलाल अपने रूख को स्प्ष्ट करे। वरना किसानों के विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। जिसका फैसला रोहतक किसान महापंचायत में लिया जाएगा।
ये रहे मौजूद |
 इस अवसर पर प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, जिलाध्यक्ष कुलदीप बलाना, करनाल महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा नीलम राणा, प्रदेश महासचिव चुहड़ सिंह रावल, पूर्व जिलाध्यक्ष जय करण कादियान, करनाल जिलाध्यक्ष यशपाल राणा, जिला प्रोग्रामर जयपाल कुराना, कोषाध्यक्ष तेजपाल उझा, करनाल जिला महासचिव सतपाल बड़थल, किसान नेता बाबूराम बड़थल, इसराना खंड प्रधान देवेंद्र जागलान, चोबीसी प्रधान तेजबीर, पालेराम, सुखबीर नौलथा, दया सिंह पाथरी, बनवारी लाल अहर, जगमेंद्र छिछराना, नफे सिंह, रधबीर सिंह, दीपचंद देशवाल, सतीश कलसोरा, सुरेंद्र सागवान, महताब कादियान, बलबीर सिंह, धर्मबीर नेहरा सहित सैंकडो किसान मौजूद थे

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