हरियाणा में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने करोड़ों की योजना की तैयार

हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 193.63 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है।हरियाणा के अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ बनवारी लाल ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका वे लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत किसानों को गेहूं, दलहन की फसलें व फसल चक्र (बाजरा+चना), (मूंग+चना) व मोटे अनाज, गन्ना और कपास की फसलों में खरपतवार नाशक/ कीटनाशकों, बीज वितरण व स्प्रे-पंप पर अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार, ‘आत्मा’ स्कीम के अंतर्गत ट्रेनिंग मद में ट्रेनिंग, भ्रमण, प्रदर्शन इत्यादि करवाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि ‘इन-सीटू क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट स्कीम’, ‘सबमिशन ऑफ़ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन स्कीम’ व ‘अनुसूचित जाति के समूहों हेतु कृषि यंत्रों को अनुदान पर उपलब्ध करवाने की राज्यस्तरीय योजना’ के तहत कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत का अनुदान लाभ ऐसे किसानों को दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ सरकार द्वारा ऐसे किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ भी उपलब्ध है।
डॉ बनवारी लाल ने बताया कि इन योजनाओं में बायोगैस स्कीम के तहत 1 क्यूबिक के बायोगैस प्लांट पर 10 हज़ार रुपये और 2 से 6 क्यूबिक बायोगैस प्लांट पर 13 हज़ार रुपये प्रति सयंत्र अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार, भूमिगत पाइप लाइन स्कीम, फब्बारा संयंत्र प्रणाली तथा टपका सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत किसी भी सिंचाई प्रणाली पर कुल खर्च का 85 प्रतिशत अनुदान भी ऐसे किसानों को उपलब्ध करवाया जा रहा है।
एलुमिनियम आधारित सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर अनुसूचित जाति के किसानों को कुल खर्च का अधिकतम 28650 रुपये का लाभ दिया जा रहा है। इसी तरह, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति आबादी वाले गांव में जल संचयन संरचनाओं का निर्माण तथा हल्दी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना करके उस के माध्यम से अनुसूचित जाति के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देने का भी प्रावधान सरकार द्वारा किया गया है। इसके साथ-साथ फसल बीमा योजना का लाभ भी ऐसे किसानों को दिया जा रहा है।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ में किसानों को अपना पंजीकरण जरूर करवाना चाहिए ताकि वे इन योजनाओं का लाभ ले सकें।

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