बेसहारों का सहारा बने मनोज कपूर

पानीपत (अमित जैन)

भगवान ने धरती पर बुद्धि के साथ साथ बोलने की शक्ति सिर्फ इंसान को ही दी है ताकि वह अपनी आपबीती किसी दूसरे को बोल कर बता सके और दूसरे की सुन सके लेकिन बहुत से इंसान इस दुनिया में ऐसे भी हैं जो कि इस दुनिया में बेजुबान जानवरों एवं पशु पक्षियों की मूक आवाज को समझकर उनका सहारा बनते है।

ऐसा ही काम पानीपत के रहने वाले मनोज कपूर ने किया जो लगभग पिछले 5 सालों से ऐसे बेसहारा जानवरों की जुबान समझकर को समझ कर उन को होने वाली असहाय पीड़ा का इलाज कर सेवा कर रहे हैं।

मनोज ने बताया कि वह सन 2015 में पुराने कोर्ट रोड के पास क्रेन सर्विस का काम करता था तो एक दिन उनके ऑफिस के पास एक चोटिल हालत में उन्हें गाय दिखी तो उन्होंने उसके लिए कई गौशालाओं में फोन किया तो कोई भी समय पर नहीं आया एक-दो दिन का इंतजार करने के बाद भी जब कोई नहीं आया तो उसने खुद ही उसका इलाज करने की सोची तभी पशुओं के डॉक्टर से संपर्क कर दवाई लाया।

इलाज करवाया और कुछ समय बाद गाय ठीक हो गई तो उसी दिन से मन में ठान लिया कि अब किसी भी बेसहारा या चोटिल जानवर को होने वाले दुख का इलाज व स्वयं करेंगे जिसके लिए तभी से 2016 में 5 से 7 युवाओं की एक टीम बनाई और डॉक्टरों के साथ लगभग 6 महीने रहकर प्राथमिक चिकित्सा सीखी और शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में जाकर ऐसे पशुओं का इलाज करना शुरू कर दिया।

इसके साथ ही अपनी टीम को भी ट्रेंड करते हुए दर्द का टीका आदि लगाना सिखाया ताकि समय रहते पशु को दर्द से तो निजात दिलाई जा सके। और अभी तक लगभग 5 से 6 हजार गायों के साथ-साथ अन्य पशु पक्षियों का इलाज किया जा चुका हैं।और गौ रक्षक दल में रहकर सेवा कार्य करते हुए पूरी टीम के साथ मिलकर मजबूती के साथ काम किया।

*किसी अपने की सेवा कर रहा हूं* मनोज ने कहा कि गाय आदि का जब इलाज करना शुरू किया तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मैं किसी अपने की सेवा कर रहा है। और जिससे आत्मिक शांति के साथ साथ एक बेहद सुख का अनुभव होता है जो किसी भी धन दौलत से खरीदा नहीं जा सकता।

*गायों का पंजीकरण करने की व्यवस्था करनी चाहिए सरकार को* वर्तमान समय में हरियाणा में जो गाय दूध देना बंद कर देती है तो कई बार उन्हें रखने वाले ने छोड़ देते हैं और फिर वे बेसहारा हो जाती है ओर सड़कों आदि कई स्थानों पर घूमती है।जिससे एक तो उनके चोटिल होने का खतरा होता है वहीं दूसरी ओर कई बार इस वजह से कई हादसे भी हो जाते हैं जो कि चिंता का विषय है। इसके लिए सरकार और प्रशासन के लिए एक सुझाव है कि जब सरकार इंसानों का रिकॉर्ड रखती है तो क्यों ना व स्थानीय प्रशासन द्वारा किसी भी जिले में जितनी डेरिया हैं उनमें रखे जाने वाली गायोंआदि का भी रिकॉर्ड मेंटेन करवाएं ताकि पता लग सके कि कितनी गाय डेयरी मालिकों के पास है और कितनी छोड़ दी गई है जिससे होने वाले हादसों पर रोक लगाई जा सके।

इसके साथ ही सरकार को अमेरिकन गाय की नस्ल को बढ़ावा देने की बजाय अपनी देसी गाय की नस्ल को बढ़ावा देना चाहिए।

Leave a Comment